Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full [2021]

भगवान की स्तुति का पाठ।

रायण वृक्ष के नीचे देवराज इंद्र द्वारा स्थापित प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के प्राचीन चरण पादुका जी हैं। यहाँ तीसरा चैत्यवंदन होता है। चैत्यवंदन पाठ:

शत्रुंजय महातीर्थ पालिताना जैन धर्म के सबसे पवित्र और सर्वोच्च तीर्थों में से एक है। इस पावन भूमि के कण-कण में अनंत सिद्ध आत्माओं का वास है। पालिताना की यात्रा के दौरान भावपूर्वक 'पंच चैत्यवंदन' (5 Chaityavandan) करने का विशेष महत्व है। चैत्यवंदन प्रभु की भक्ति, स्तुति और आत्म-शुद्धि का एक सशक्त माध्यम है।

यहाँ "Palitana 5 Chaityavandan in Hindi Full" विषय पर एक विस्तृत लेख प्रस्तुत है। यह लेख विशेष रूप से जैन धर्मावलंबियों, विशेषकर श्वेतांबर मूर्तिपूजक समुदाय के लिए उपयोगी है, जो पालिताना की पवित्र यात्रा के दौरान पाँच चैत्यवंदन करना चाहते हैं।

पालीताना गिरिराज की तलहटी में प्रवेश करते ही सबसे पहला चैत्यवंदन पर किया जाता है। यह तीर्थ के प्रति समर्पण का प्रतीक है। चैत्यवंदन मूल पाठ: palitana 5 chaityavandan in hindi full

पालिताना ५ चैत्यवंदन विधि और पाठ (Palitana 5 Chaityavandan in Hindi Full)

- पंचम चैत्यवंदन

कोटि कल्याणक ए गिरिवरे, कया अनंता सिद्ध।कण-कण माँहे प्रगट रही, आतम सुखनी रिद्धि।।सकल जिनेश्वर देवने, वंदूं जोडी हाथ।शत्रुंजय सम तीरथ मळ्यो, धन्य थया हम नाथ।।

शत्रुंजय गिरिराज पर एक क्षण का भाव-वंदन करोड़ों उपवासों के समान फलदायी माना गया है। दीठे दुर्गति वारे

पालिताना (Shatrunjay Mahatirth) की यात्रा जैन धर्म के सबसे पवित्र अनुष्ठानों में से एक है। यहाँ की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक आप पूर्ण नहीं करते। यह ब्लॉग आपको इन पांचों चैत्यवंदन के अर्थ, क्रम और हिंदी लिरिक्स की पूरी जानकारी प्रदान करेगा। चैत्यवंदन क्या है?

जयतळायु तीरथ वंदूं भावसुं, चरम जिनेश्वर पाय।मरुदेवा माता सुर-विमाने बेसीने, केवल लही मोक्ष जाय॥ १ ॥शत्रुंजय समो तीरथ नहीं कोई जगमां, सिद्ध भये अनंत मुनीश।तेहना चरणकमल वंदन करीने, नमाउं त्रिजगनो ईश॥ २ ॥फागण सुद तेरस दिन मोटो, कोडि पांच मुनिराज।थावच्चापुत्र मुनिराज वर प्रधान, सिद्ध भया सरसाव्या काज॥ ३ ॥विमलवाहन आदि जिनवर केरा, पादपद्म धरी ध्यान।'कीर्तिविजय' कद्दे शिवसुख लेशे, जे करशे तीरथ ध्यान॥ ४ ॥

: Commemorates the 99 visits of Lord Adinath to this holy site.

इस विस्तृत लेख में पालिताना यात्रा में किए जाने वाले , उनका महत्व और विधि विस्तार से दी गई है। भाव धरीने जे चढे

Performed at the sacred Rayan tree where the first Tirthankara, Lord Adinath, used to sit in meditation. :

श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरीने जे चढे, तेने भव पार उतारे।अनंत सिद्धानो आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवानुं ऋषभदेव, ज्यां ठाविया प्रभु पाय।सूरजकुंड सोहामणो, कावडयक्ष अभिराम;नाभिराय कुल मंडनो, जिनवर करूं प्रणाम।

भव सायर थी तारि ने, शिवपुर ना सुख आपता। 2 ॥ भावार्थ:

एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो;रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो।एह गिरि नी महिमा अनंत, कुण करे वखाण;चैत्री पूनमने दिने, तेह अधिको जाण।एह तीर्थ सेवों सदा, आणी भक्तिधार;श्री शत्रुंजय सुखदायको, दान विजय जयकार।

पांच सौ धनुष की देहडी, प्रभुजी परम दयाल;

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