Dr Zakir Naik Vs Sri Sri Ravi Shankar Debate Full !full! In Hindi Now

डॉ. ज़ाकिर नाइक एक प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वान और इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। वह एक प्रभावशाली वक्ता हैं और उन्होंने इस्लाम के बारे में कई पुस्तकें और व्याख्यान दिए हैं। नाइक का तर्क है कि इस्लाम एक शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण धर्म है, और यह दुनिया के सभी धर्मों से बेहतर है।

डॉ. जाकिर नाइक ने अपने तर्कों को मुख्य रूप से और हिंदू धर्म के वेदों/उपनिषदों के हवाले से प्रस्तुत किया। उनके मुख्य बिंदु थे:

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कुछ लोगों का मानना था कि डॉ. नाइक ने तथ्यों और ग्रंथों के संदर्भों का सटीक उपयोग किया।

भारत और दुनिया भर में धर्म, अध्यात्म और तर्कशास्त्र की चर्चाओं में, कुछ डिबेट्स (बहस) ऐतिहासिक महत्व रखती हैं। ऐसी ही एक प्रमुख डिबेट और श्री श्री रवि शंकर के बीच 2006 में बैंगलोर में हुई थी। यह डिबेट "इस्लाम और हिंदू धर्म में पवित्र ग्रंथों के प्रकाश में ईश्वर की अवधारणा" (The Concept of God in Islam and Hinduism in the Light of Sacred Scriptures) विषय पर केंद्रित थी। डॉ

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यह लेख आपको इस महत्वपूर्ण बहस के बारे में देने का प्रयास है। यह न तो किसी धर्म विशेष की पक्षपातपूर्ण टिप्पणी है और न ही किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कोई आरोप। dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi

1. ईश्वर का स्वरूप: साकार बनाम निराकार

डॉ. ज़ाकिर नाइक अक्सर हिंदू ग्रंथों (वेद, पुराण) का हवाला देते हैं और तुलना करते हैं। उन्होंने एक बार कहा था कि "यदि हिंदू धर्म में ईश्वर एक है, तो मूर्ति पूजा क्यों?" हालाँकि, उन्होंने कभी नाम लेकर श्री श्री रवि शंकर को लक्षित नहीं किया।

उन्होंने वेदों (यजुर्वेद, अथर्ववेद) और उपनिषदों से उद्धरण देकर यह साबित करने की कोशिश की कि ईश्वर 'एक' है, निराकार है, और उसकी कोई प्रतिमा (मूर्ति) नहीं हो सकती।